जीवन में कई बार कुछ ऐसा भी हो जाता है जब किसी को किसी से प्यार हो जाता है माँ का प्यार बाप का दुलार तक भी याद नहीं रहता याद रहता है तो बस महबूबा का प्यार जीहाँ प्यार इसे ही तो कहते हैं
आपका चिठ्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं… एक अर्ज है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा लीजिये, फ़िलहाल हिन्दी में इसकी आवश्यकता नहीं है… धन्यवाद…
2 टिप्पणियां:
क्या बात है
सटीक और बहुत खूब लिखा
आपका चिठ्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं… एक अर्ज है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा लीजिये, फ़िलहाल हिन्दी में इसकी आवश्यकता नहीं है… धन्यवाद…
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