सोमवार, 1 दिसंबर 2008

जीवन में कई बार कुछ ऐसा भी हो जाता है
जब किसी को किसी से प्यार हो जाता है
माँ का प्यार बाप का दुलार
तक भी याद नहीं रहता
याद रहता है तो बस महबूबा का प्यार
जीहाँ प्यार इसे ही तो कहते हैं

2 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

क्या बात है
सटीक और बहुत खूब लिखा

Unknown ने कहा…

आपका चिठ्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं… एक अर्ज है कि वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा लीजिये, फ़िलहाल हिन्दी में इसकी आवश्यकता नहीं है… धन्यवाद…